कौन हैं सिंधुताई सपकाळ । Who Is Sindhutai Sapkal

पिछले कुछ घंटों में आप में से अधिकतर लोगों ने Social Media पर सिंधुताई सपकाळ जी की तस्वीर जरूर देखी होगी | आप में से बहुत सारे लोग उनके बारे में पहले से जानते होंगे | जो इनके बारें नहीं जानते होंगे वो अब जरूर जान गए होंगे, इससे पहले कई नेता, अभिनेता, और बड़े प्रभावशाली लोगों की भी मृत्यु हुई है परंतु जनता में इतना स्नेह बहुत ही मुश्किल से किसी के प्रति देखा गया है । 
वो केवल कुछ हज़ार अनाथ बच्चों को आसरा देने वाली समाज सेविका नहीं थी | उनके व्यक्तित्व की गहराई को इन आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता । आज अनगिनत संस्थाएं अनाथ बच्चों के लिए कई कार्यक्रम चला रहे हैं, परंतु बच्चों को ममता केवल माँ का कोमल हृदय ही दे सकता है | उन्होने अपने साक्षात्कार में बताया किस तरह वो भूखी दर - दर भटकने के दिन देख चुकी हैं लेकिन उस दौरान भी उनके अंदर अनाथ और लाचार लोगों के प्रति सहानुभूति थी, और इसी बात ने उन्हें  जीवन में आगे बढ्ने को प्रेरित किया | 

"कबीर सोई पीर है, जो जाने पर पीर । जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपीर ॥"
सच्चा संत (पीर) वही है जो दूसरे की पीड़ा को जानता हो, उसे समझता हो |  जो दूसरे के दुःख को नहीं समझते, वे निष्ठुर हैं |
एक बार उन्होने कहा "हम सिर्फ खुद खाएं तो वो विकृति है, दूसरों को खिलाना हमारी संस्कृति है" | बड़ी बातें बहुत सहजता से कह जाना उन्हें औरों से अलग बनाता है |
आज हर किसी को ऐसा लग रहा है जैसे कोई उनका अपना चला गया | पद्मश्री जैसा उच्च सम्मान मिलने के बावजूद भी उनमें वो प्रेम भाव कायम रहा | इस दुनिया में रहते हुए आप भले ही कितना भी पैसा क्यूँ न कमा लें, जब तक लोगों के दु:ख को आप अपना नहीं समझेंगे तब तक इंसान कहलाना केवल औपचारिकता होगी | 

किसी संवाद के दौरान उन्होने कहा "अन्य राज्य की पुस्तक में उनके बारे में लिखा गया है, परंतु जिस स्थान पर रहते हुए उन्होने संघर्ष किया उस राज्य की पुस्तक में उनके कार्य का जिक्र नहीं है, शायद बड़ा होने के लिए मरना पड़ता है" | 
और यही हमारे समाज का एक कटु सत्य है | 

आने वाली पीढ़ियाँ Sindhutai Sapkal जी को याद करते हुए प्रेरणा लेंगी |
  

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