Nature Of Saint | संत प्रवृति | Sant Swabhav | संत स्वभाव | Sant Pravriti

संत प्रवृति 

जितना समझे  उतना उलझे  पर मक़सद  हाथ ना आया है 
जीवन गणित को अपने दम पर हल कहां कोई कर पाया है

ग़ाफ़िल इंसान  को जब  वजूद का  कोई  प्रश्न  सताया है
ख़ुदा कई  बार नया  रूप बदल हर  उत्तर साथ में लाया है 

रुसवाई  हासिल हो  बेशक  पर अपना  काम  नहीं छोड़ा
दुनिया की तल्ख़ियों को  हंसकर संतों  ने गले  लगाया है

अपने हिस्से  ज़ख्म  मिले हों  फिर भी  सह कर मुस्काना
या-रब कुछ लोगों ने कितना मुश्किल किरदार निभाया है

ख़ुश्बू  मक़्सद है  जिनका  ख़ार से  उनको  मतलब  क्या
फूलों ने  अपने  जीवन  से  मुख़्तसर  यही  समझाया  है 

इल्तज़ा है  "साहिब" इतनी सी राहत संसार को देना  तुम
कुछ इंसानों  ने  धरती  को  नुकसान  बहुत  पहुंचाया  है 

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